Delhi Removes 6.6 Million Old Vehicles,

दिल्ली में 66 लाख पुराने वाहन हटे, फिर भी 87.6 लाख पहुंचा कुल वाहनों का आंकड़ा

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Delhi Removes 6.6 Million Old Vehicles

राजधानी दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार लगातार सख्त कदम उठा रही है। इसी कड़ी में मार्च 2026 तक 66 लाख से अधिक पुराने वाहनों को रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। इसके बावजूद शहर में कुल वाहनों की संख्या घटने के बजाय बढ़कर लगभग 87.6 लाख हो गई है, जो नई चिंता पैदा कर रही है।

सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लागू किया है। इसी नियम के तहत बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए लाखों वाहनों को रिकॉर्ड से हटाया गया। इस पहल का उद्देश्य राजधानी की हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना और प्रदूषण के स्तर को कम करना है।

हालांकि पुराने वाहनों को हटाने के बावजूद सड़कों पर दबाव कम नहीं हुआ। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के मुताबिक दिल्ली में नए वाहनों का पंजीकरण लगातार बढ़ रहा है, जिससे कुल वाहनों की संख्या 87.6 लाख तक पहुंच गई है।

दिल्ली में दोपहिया वाहन सबसे अधिक हैं। बाइक और स्कूटर सस्ते और सुविधाजनक होने के कारण लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। इसके बाद कार और अन्य निजी वाहनों का स्थान आता है। वहीं माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े वाहनों की संख्या में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है।

इसके विपरीत बस और टैक्सी जैसे सार्वजनिक परिवहन साधनों की वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी है। निजी वाहनों के मुकाबले इनकी संख्या उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही, जिसके कारण लोग अब भी निजी गाड़ियों पर ज्यादा निर्भर हैं। इससे सड़कों पर भीड़ और प्रदूषण दोनों बढ़ रहे हैं।

अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2020–21 तक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। हालांकि 2021–22 में कोरोना महामारी और वाहन स्क्रैपिंग नीति के कारण इसमें गिरावट आई। लेकिन हालात सामान्य होते ही फिर से वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी।

एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अब हर 1000 लोगों पर वाहनों की संख्या पहले से अधिक हो गई है। यह इस बात का संकेत है कि सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है।

कुल मिलाकर स्थिति यह है कि एक ओर सरकार पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर निजी वाहनों की बढ़ती मांग इन प्रयासों को चुनौती दे रही है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण और बेहतर शहरी परिवहन व्यवस्था सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है।